Wo Aurat Hai, Wo Nari Hai

वो औरत है, वो नारी है

वो औरत है, वो नारी है
हर घर की वो बेमिसाल कहानी है
वो बेटी है, वो मां है,वो बहन है
मस्ती अठखेलियां करती दोस्त भी है
बड़े शोख से सजती संवरती दुल्हन भी है किसी की

कोई उसे लक्ष्मी का औधा दे कर उसका सम्मान करता
कोई उसे मात्र एक सामान समझ कर नकारता

कोई उसे पूजता ,कोई उसे बेइंतहा चाहता,कोई उसे प्यार से पुकारता
कोई उसे कोसता,कोई उसे तोड़ता,तो कोई बेरहमी से प्रताड़ित करता

कोई उसे अपनी बाहों में समेटता
कोई उसे अपने बाहों के फंदे में फंसता

कोई इश्क की मूरत बना कर, सात जन्मों के लिए संग अपने जोड़ता
तो कोई कुछ पल भोग कर बेदिली से छोड़ता

तुमने ममता की मूरत है ,दिखती
जरूरत पड़ने पर चंडी काली सी भी दहक उठती

बरसों पुरानी घर छोड़ने की रीत है
पर क्यों भला बस इसके ही हिस्से विरह वेदना की गीत है

अनजान व्यक्ति,अनजान परिवार में ढल जाना
किसी को अपने माथे की बिंदिया के रूप में सजाना

वो प्यार है,वो दुलार है,वो जिंदगी के खुशियों की खुली किताब है
बच्चों को अपने बड़े लाड़ प्यार से पालती
कितने शोख अपने, हंस के यू टालती

सबके खुशियों के खातीर,हर गम छुपा लेती है, वो
सबके पसंद का ख्याल रखने का जज्बा कमाल है
सबके दिलो को जितने का हुनर बेमिसाल है

क्यों कुछ नहीं कहती हो तुम, क्यों सब कुछ यूं सहती हो तुम
तुममें भी तो कुछ जान है,तुम्हारी भी अलग एक पहचान है

तुमसे है,ये संसार ये जान लो, बहुत खास हो तुम ये मान लो
तुम हो तो सबमें अर्थ है,तुम बिन यहां सब व्यर्थ है

जिसने यह सृष्टि है श्रृंगारी ,वो औरत है,वो नारी है
वो औरत है,वो नारी है

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