Insaan Kitna Murkh Hai

इन्सान कितना मूर्ख है

इन्सान कितना मूर्ख है

प्रार्थना करते समय सोचते है, कि भगवान सब सुन रहे है

लेकिन किसी की निन्दा करते समय,ये भूल जाते है

पुण्य का कार्य करते समय सोचते है, कि भगवान सब देख रहे है

लेकिन पाप करते समय, ये भूल जाते है

दान करते समय सोचते है, कि भगवान सब में बसते है

लेकिन चोरी करते समय, ये भूल जाते है

प्रेम करते समय सोचते है, कि पूरी दुनिया भगवान ने बनाई

लेकिन नफरत करते समय,ये भूल जाते

घर बनाते समय सोचते है, कि ये भगवान का मन्दिर है

लेकिन भगवान रूपी माता – पिता को घर से निकालते समय ये,भूल जाते

स्त्री के सम्मान की चर्चा करते समय सोचते है , कि स्त्री शक्ति स्वरूप है

लेकिन दुष्कर्म, अन्याय करते समय,ये भूल जाते है

सत्य की व्याख्या करते समय सोचते है,कि ये सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र है

लेकिन अपने फायदे के खातिर झूठ का पुल बांधते समय,ये भूल जाते है

परंतु ये सभी भूल गए है,कि

कदर इन्सान की नहीं इंसानियत की होनी चाहिए

इन्सान कद में बड़ा नहीं होता

अपने किए गए कर्मों से बड़ा होता है

वरना कद  में तो साया भी इन्सान से बड़ा ही होता है…….

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