Beinteha Pyar

Beinteha Pyar

Suno n
Mujhe tumse tumhari hi dher sari shikayt karni hai
Tum sunoge kya…?
Ye kaisa lgaw hai
Tumse ladne ke baad
Tum phle se kayi guna jayda yaad aane lgte ho

Kya mujhe…
Sari umra esi tarh Beinteha pyar karoge kya…?

Haan thori pangal,hun shararti hun
Gussa krti hun,itrati hun
Tum mere sare nakhre uthaoge kya..?

Bhut bde bde soukh nhi h mere
Tum pyar ho mere
Mujhe v pyar se rakh paoge kya…?

Ho jaye agar galti se, koyi galti koyi
To thora daant kar
Mujhe gale se lga loge kya…?

Apne gharwalon ki tarh tumhare ghar ka khyal rakhungi
Unhe koi shikayat ka mouka na dungi
Mere gharwalon ko apna maan paoge kya…?

Agar kvi aa jaye mujhe mayke ki yaad
Aur mera chehra murjha jaye to
Mujhe hsa paoge kya…?

Ghumne picture dekhne ka soukh nhi
Apni bahon me bhar kar apna haq jta paoge kya…?

Agar kavi koi mujh par ungli uthaye
Ya mere man ko taqleef phuchaye
To kya
Mere khatir unse lad paoge…?

Mere tumhare bich kvi koi tisra n aaye
Hmare bich kvi koi darar n aaye
Eska wada kr paoge kya…?

Ek aur khwahish h meri
Tum sunoge kya…
Har roj meri mangh ko apne haathon se szaoge n…..?

✍ Shweta Mehta

बेइंतेहा प्यार

सुनो ना
मुझे तुमसे तुम्हारी ही ढेर सारी शिकायत करनी है
तुम सुनोगे क्या …?
ये कैसा लगाव है
तमसे लड़ने के बाद
तुम पहले से कई गुना ज्यादा याद आने लगते हो

क्या मुझे …
सारी उम्र इसी तरह बेइंतहा प्यार करोगे क्या …?

हा थोरी पागल हूं, शरारती हूं
गुस्सा करती हुं, इतराती हुं
तम मेरे सारे नखरे उठाओगे क्या ..?

बहुत बड़े बड़े शोख नहीं है
तुम प्यार हो मेरे
मुझे भी प्यार से रख पाओगे क्या …?

हो जाये अगर गलती से, कोई गलती कोई
थोड़ा डांट कर
मुझे गले से लगालोगे क्या …?

अपने घरवालों की तरह तुम्हारे घर का ख्याल रखूंगी
उन्हें कोई शिकायत का मौका ना दूंगी
मेरे घरवालों को अपना मान पाओगे क्या …?

अगर कभी आ जाये मुझे मायके की याद
और मेरा चेहरा मुरझा जाए
मुझे हंसा पाओगे क्या …?

घूमने पिक्चर देखने का शौक नहीं
अपने बाहों में भर कर अपना हक जता पाओगे …?

अगर कभी कोई मुझ पर उंगली उठाए
या मेरे मन को तकलीफ़ पहुंचाए
मेरे खतीर उनसे लड़ पाओगे क्या …?

मेरे तुम्हारे बीच कभी कोई तीसरा न आए
हमारे बीच कोई दरार न आये
इसका वादा कर पाओगे क्या …?

एक और ख्वाहिश है मेरी
तुम सुनोगे क्या …
हर रोज मेरी मांग को अपने हाथों से साजाओगे न …..?

✍ Shweta Mehta

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