Ae Zindagi

ए- ज़िन्दगी

ए- जिंदगी! तेरे इस माया जाल में
खुद को तलाशती हूं मैं
गिरती हूं, उठती हूं
फिर चलना सीख जाती हूं
मुझे नहीं पता क्या है गलत,सही क्या है
बस मुश्किलों में खुद को अकेला पाती हूं मैं
ए- जिंदगी! तेरे इस माया जाल में
खुद को तलाशती हूं मैं

ख्वाबों को सजाना जानती हूं
हम में मुस्कुराना जानती हूं
अपनों की खुशी के लिएको समझौता करना जानती हूं मैं
रिश्तों को निभाना जानती हूं मैं
ए- जिंदगी! तेरे इस माया जाल में
खुद को तलाशती हूं मैं

कौन है अपना कौन पराया है
वक़्त के आइने में सबको बदलते पाया है
ख्वाबों और ख्वाहिशों को हाथ से फिसलते देखती हूं
खुद को बहुत अकेला मेहसूस करती हूं
ए- जिंदगी! तेरे इस माया जाल में
खुद को तलाशती हूं मैं

इतने साल गुजारे है हमने
खुद की तलाश में
न तलाश पायी आज भी खुद को वक़्त के इस आइने में
ए- जिंदगी! तेरे इस माया जाल में
खुद को तलाशती हूं मैं

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