Aakhir Aisa Kyu

आखिर ऐसा क्यों?

स्त्री
कितना छोटा सा शब्द है न….?
पर इस छोटे से शब्द में ही सारा संसार बसा है….

स्त्री
जिसे लोग देवी के रूप में, मां के रूप में पूजते है….
फिर क्यों दो लोगों के झगड़े में गाली स्त्री के उपर ही होती है…?
आखिर ऐसा क्यों?

स्त्री
जो रामायण में सीता बन कर भी सताई गई…
महाभारत में द्रोपदी बन कर भी सताई गई….
और अब इस कलयुग में अपने ही घर वालो से सताई जाती है….
आखिर ऐसा क्यों?

स्त्री
बचपन से ही सिखाया जाता है,अपने दायरे में रहो….
पर इन्हें…. पर इन्हें क्या मालूम
जो दायरा तोड़ते है, वही तो नाम बनाते है…
हम कैसे भूल सकते है,उन स्त्रियों के बलिदानों को,जो हमे सशक्त बनना चाहती थी…
आखिर ऐसा क्यों?

स्त्री
जो अपने कर्म को ही अपना कर्तव्य समझती है….
और उसे बड़ी ही लग्न के साथ पूरा करती है…
फिर भी उसे बदचलन, बेहया, कुलनाशिनी, कुलक्षणी जैसे कुशब्दो से संबोधित किया जाता है…..
आखिर ऐसा क्यों?

स्त्री
जिसे यह बताया जाता है…ये तुम्हारा घर नहीं
तुम पराई हो, पराये घर जाना है…
बेटियां तो पराया धन होती है…
और ससुराल वाले एक गलती होने पर यह सुनाते है…
“ये तुम्हारे बाप का घर नहीं”
आखिर ऐसा क्यों?

स्त्री
जिसे तुक्ष समझा जाता है…
समुन्द्र से कुछ जल निकाल लेने से उसमे कोई कमी नहीं होगी…
पर इस संसार रूपी समुन्द्र से जल नामक स्त्री के निकल जाने से,इस संसार की कल्पना करना भी संभव नहीं है……​

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